विजय नगर किंगडम की स्थापना यानि संगम वंश का उदय
हम जानते है की संगम वंश की स्थापना १३३६ ई ० हरिहर और बुक्का ने की थी देवराज प्रथम के शासन काल में इटली का यात्री निकोलो कोटी भारत की यात्रा पर आया था देव राज द्वितीय के समय में फारस के दूत अब्दुलरज्जाक ने विजय नगर की यात्रा की थी महान तेलुगु कवि श्रीनाथ देवराज द्वितीया के दरबारी थे १५१० ई ० में इस वंश के शासक कृष्ण देवराय से पुर्तगाल के गवर्नर ने भटकल में दुर्ग निर्माण की अनुमति मांगी थी कृष्ण रॉय ने राजनीति पर अमुक्तमालायद और एक सस्कृत नाटक की रचना की जिसका नाम जाम्ब्वतिकल्याण था
कृष्ण देव राय वैषणव धर्म का अनुयाई था इसके दरबार में ८ विद्वान रहते था इसलिए अष्ट दिग्गज कहा गया तेनालीराम इसका दरबारी था कृष्ण देवराज ने हजारा मंदिर और विठ्ठल स्वामी मंदिर बनवाया इस वंश का अंतिम शासक सदाशिव था जॉब होने प्रधानमंत्री के प्रभाव में था सालुव वंश का संस्थापक नरसिंह था इसने दखिन के पांड्या ,और चोल ,चेर को पराजित किया और १५८६ तक शासन किया १६१२ ई ० विजय नगर के विघटन से मैसूर राज्य की स्थापना हुई
बहमनी साम्राज्य का उदय हो गया इसकी स्थापना १३४७ ई ० हसन गंगू बहमन शाह ने की
हासन गंगू ने गुल बर्गा को राजधानी बनाया और खलीफा से शासन की अनुमति ली बहमनी और मुहम्मद के शासन कल में विजय नगर और वारंगलमें युद्ध हुआ बहमनी शासक ताज उद्दीन फिरोज ने दौलताबाद में वेध शाला का निर्माण कराया

