बाबर ने भारत पर आक्रमण कितनी बार की
हम जानते फरगाना की गद्दी पर बैठते ही भारत पर पांच बार आक्रमण किया इसके साथ ही काबुल पर आक्रमण किया और सिंध पर कब्जा किया और १२ अप्रैल १५२६ ई ० पानीपथ का युद्ध दिल्ली के तत्कालीन अफगान शासक इब्राहिम लोदी को पराजित किया बाबर ने मंगोल सैन्य विधि व मंगोलो की ब्यूह रचना का प्रयोग किया था इसके बाद आगरा से ४० किलो मीटर बाबर और राणा सागा की सेना का युद्ध हुआ और राणा पराजित हो गए इसे खानवा का युद्ध कहा जाता है इसके बाद राणा सांगा के ही सामंतो ने उनको जहर देकर मर दिया और इसी युद्ध में बाबर ने जेहाद का नारा दिया और युद्ध जीतने के बाद अपने आप को गाजी की उपाधि धारण की और २६ दिसम्बर १५३० ई ० में बाबर की मृत्यु हो गई बाबर के शरीर को पहले यमुना के किनारे रामबाग में दफनाया गया लकिन बरार की इच्छा के अनुसार काबुल में दफनाया गया
बाबर की उदारता के कारण कलंदर भी कहा जाता था
बाबर ने अपनी आत्म कथा किस भाषा में लिखी और आत्म कथा का नाम क्या था
बाबर ने अपनी आत्म कथा तुर्की भाषा में लिखी और इसका नाम तुजुक -ए - बाबरी था
बाबर की आत्म कथा को अब्दुल रहीम खान खाना ने फ़ारसी में अनुबाद किया बाबर सूफी संत का अनुयायी था सूफी ख्वाजा उबर दुला का शिष्य था बाबर की मृत्यु के बाद नसीरुद्दीन हुमायु २९ दिसम्बर १५३० ई ० को आगरा की राजधानी २३साल की उम्र में मुग़ल सिंहासन पर बैठा
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