बाबर की मृत्यु के बाद नसीरुद्दीन हुमायु २९ दिसम्बर १५३० को राजधानी आगरा में २३ साल की उम्र में सिंहासन पर बैठा एक माह बाद गंगा किनारे २७ मई १५४० ई ० को कन्नौज का युद्ध हुआ और शेरशाह के नेतृत्व में अफगानो ने मुग़ल को हरा दिया और हुमायु को गद्दी छोड़ कर भगना पड़ा और दिल्ली की सल्तनत शेरशाह के कब्जे में हो गई
निर्वासित का जीवन जीते हुए भटखल के निकट शेख अली अख्तर की लड़की हमीदा से शादी कर ली और वही आगे चल कर अकबर की माँ बनी १५५६ ई ०मे दीन पनाह पुस्तकालय की सीढ़ी से गिर कर मृत्यु हो गई
हुमायु ज्योतिष में विश्वास रखता था और सतो दिन अलग अलग कपड़े पहनता था
शेरशाह और सुर साम्राज्य को उदय कैसे हुआ आइए जानते है
इसका बचपन का नाम फरीद था सुर साम्राज्य की स्थापना की इसका जनम १४७२ ई ० बजवाड़ा के होशियारपुर में हुआ था शेरशाह का अंतिम युद्ध १५४४ ई ० में हुआ और इस युद्ध को कालिंजर में माना जाता है
सूरी की मृत्यु २२ मई को हो गई इसके इसका पुत्र इस्लामशाह ने गद्दी सभली इसके आयोग होने कस कारण २३ जुलाई १५५५ ई ० हुमायु ने सुर को गद्दी से हटाने में सफल हुआ

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