स्वाधीनता आंदोलन की शुरुआत
१० मई को १८५७ को क्रांति की शुरुआत हुई थी स्वाधीनता संग्राम का प्रतिक रोटी और कमल था और इस क्रांति की रहनुमाई खान बहादुर ने की थी जो रुहेलखंड के भूतपूर्व शासक थे जो की बरेली में स्थित है
रानी लक्ष मी बाई कौन थी
इनके बचपन का नाम मणिकर्णिका था इनका जन्म १९ नवम्बर १८३५ ई ० गोल घर में हुआ था गोलघर बनारस में स्थित है इनका विवाह झांसी के महाराज गंगाधर राव के साथ हुआ था
बेगम हजरत महल कौन थी
यह अवध की बेगम थी इनका नाम बेगम हजरत था ये भी विद्रोह का सामना किये थी बेगम हजरत ने अपने पुत्र को जो की अल्पवयस्क था उसको गद्दी पर बैठा कर शासन की बागडोर अपने हाथ ली
कानपूर में ५ जून १८५७ ई ० नाना शाहब को पेशवा मानकर स्वत्रंता की घोसणा की गई नाना साहब के सलाहकार अजीमुला खा थे तात्या टोपे को रामचंद के नाम से भी जाना जाता था
कुंवर सिंह कौन थे ?
१८५७ में कुंवर सिंह ने जगदीश पुर में विद्रोह की कमान सभली थी कुंवर सिंह बिहार के भोजपुर के रहने वाले थे
आउवा के ठाकुर सिंह ने जोधपुर में अंग्रेजो की सेना को पराजित किया था और फैज़ाबाद में अहमदुल्लाह शाह विद्रोह किया था
उस समय भारत का गवर्नर कौन था
जब विद्रोह १८५७ में हो रहा था तब भारत को गवर्नर लार्ड कैनिन था इनका कार्यकाल १८५७ से १८६२ तक था
और कमांडिंड़ अफसर जनरल सर जान बैरकपुर में था
१८५७ में भारत के सेना पति कौन कौन थे
जगदीशपुर के कुंवर सिंह
लखनऊ के बेगम हजरत महल ,कानपूर के नाना साहिब ,झांसी के रानी लक्मी बाई दिल्ली के बहादुर शाह इलाहबाद के लियाक अली बरेली के खान बहादुर थे
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